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  • Acharya Bhawana Sharma

शयन कक्ष /बैडरूम का वास्तु


किसी भी भवन में बैडरूम अर्थात शयनकक्ष का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है । बैडरूम में मनुष्य अपने जीवन का लगभग एक तिहाई भाग बिताता है। यदि बैडरूम का वास्तु, bedroom ka vastu, सही हो तो व्यक्ति सकून और ताजगी का अनुभव करता है उसका स्वास्थ्य उत्तम रहता है इससे उसकी कार्य क्षमता भी बढ़ती है । लेकिन यदि बैडरूम का वास्तु, bedroom ka vastu, दोषपूर्ण हो तो व्यक्ति को सही नींद नहीं आती है, वह चिड़चिड़ा हो जाता है इससे उसका स्वास्थ्य और कार्य क्षमता दोनों ही में गिरावट होती है । यहाँ पर हम शयनकक्ष के कुछ महत्वपूर्ण वास्तु सिद्धांत बता रहे है जिससे आप सभी अवश्य ही लाभ उठाएंगे । जानिए बैडरूम का वास्तु, bedroom ka vastu, शयनकक्ष का वास्तु, Shyankash ka vastu, बैडरूम का वास्तु कैसा हो, bedroom ka vastu kaisa ho, बैडरूम के वास्तु टिप्स, bedroom ke vastu tips,

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* गृह स्वामी का शयनकक्ष Shyankash नैत्रत्य अथवा पश्चिम दिशा में होना बहुत ही उत्तम होता है । चूँकि नैत्रत्य पृथ्वी तत्व का प्रतीक है अत: इस दिशा में शयनकक्ष होने पर गृह स्वामी को उचित, एवं बड़े निर्णय लेने में आसानी होती है । उसका प्रभाव / नियंत्रण घर के बाकी सदस्यों पर रहता है । वह ऊर्जा से ओत प्रोत रहता है ।

* यहाँ पर बना शयनकक्ष Shyankash धन-धान्य, बेहतर स्वास्थ्य, सभी तरह से सुख समृद्धि एवं वंश वृद्धि करता है। यहाँ सोने से भवन के मालिक को मानसिक दृढ़ता भी मिलती है।

* सोते समय सर दक्षिण में होना चाहिए। जिससे चुम्बकीय तरंगो का प्रवाह सुचारू रूप से हो सके और नींद भी अच्छी आये ।

* शयनकक्ष Shyankash में पूजागृह बिलकुल भी नहीं होना चाहिए और शयनकक्ष में यथा संभव भोजन करने से भी बचना चाहिए ।

* अगर स्थानाभाव के कारण शयनकक्ष में पूजाघर बनाना ही पड़े तो यह कक्ष के ईशान कोण में बनाना चाहिए, उस स्तिथि में सोते समय सर दक्षिण के स्थान पर ;पूर्व की ओर रखना चाहिए जिससे पैर पूजा घर की तरफ ना हो । पूजा घर में पर्दा लगा हो और रात्रि में सोते समय पर्दे को अवश्य ही लगाकर मंदिर को ढक देना चाहिए।

* शयनकक्ष में दर्पण नहीं होना चाहिए। आजकल शयनकक्ष में ही ड्रैसिंग टेबिल का प्रचलन हो गया है जो ठीक नहीं है । अगर कक्ष में दर्पण है तो यह ध्यान रखे कि उसमें पलंग पर लेटने पर अपनी छाया नज़र नहीं आनी चाहिए । और रात्रि में दर्पण को कपड़े से ढक देना चाहिए ।

* सौलह साल की उम्र के बच्चो का शयनकक्ष पश्चिम में होना चाहिए इससे उनकी बुद्धि त्रीवता से विकसित होती है और उनके शरीर में स्फूर्ति भी बनी रहती है। उन्हें ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व की तरफ सर रखकर सोना चहिये।

* विवाह योग्य कुंवारी कन्याओ का शयन कक्ष भवन के वाव्यव में होना चाहिए इससे उनका शारीरिक विकास ठीक तरह से होता है एवं उनके विवाह में बाधाएं भी नहीं आती है ।

* अगर नवदंपती का शयनकक्ष भवन के वाव्यव एवं उत्तर दिशा के मध्य हो उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है।

* नवदंपती का शयनकक्ष भवन के ईशान दिशा में बिलकुल भी ना हो । यह देव की दिशा है अत: इस दिशा में शयनकक्ष बनाना, दम्पति का आपस में सम्बन्ध बनाना वर्जित माना गया है। अन्यथा उनको रोग, आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

* शयनकक्ष में सोते समय पाँव द्वार की तरफ नहीं होने चाहिए और पलंग भी द्वार के पास नहीं लगाना चाहिए।

* यदि भवन में एक से ज्यादा मंजिल हो तो घर के मुखिया को सदैव ऊपर की मंजिल पर ही अपना शयनकक्ष बनाना चाहिए ।

* शयनकक्ष में पलंग के उपाय कोई बीम नहीं होनी चाहिए । अगर बीम हो तो वहाँ पर फाल्स सीलिंग करा लेनी चाहिए ।

* कभी भी भवन के बेसमेंट में शयनकक्ष नहीं बनाना चाहिए, इससे न केवल स्वास्थ्य ही प्रभावित रहता है वरन आर्थिक रूप से भी स्थिति निरंतर ख़राब होती जाती है ।

* शयनकक्ष में पलंग को दक्षिणी अथवा पश्चिमी दीवार से थोड़ा हटाकर लगाना चाहिए ।

* शयनकक्ष में अलमारियाँ दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की दीवार से लगा कर बनानी चाहिए एवं उनका मुँख उत्तर अथवा पूर्व की तरफ ही खुलना चाहिए , नैत्रत्य या दक्षिण दिशा की तरफ नहीं ।

* बेडरूम का पेंट हल्के रंग का होना चाहिए । बैडरूम की दीवारों के लिए हलका गुलाबी, नीला, हल्का ग्रे या हल्का पीले रंग का ही प्रयोग करें। ये रंग शान्ति और प्यार को बड़ाने वाले माने जाते हैं।इससे मन शान्त रहता है और नींद भी अच्छी आती है ।

* शयनकक्ष में पलंग पर पति पत्नी दोनों को एक ही गद्दे / मैट्रेस पर सोना चाहिए । दो अलग मैट्रेस का प्रयोग से आपसी संबंधो में दूरी बनती है।

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