नौतपा शुरू : जानिए 25 पॉइंट्स में इन 9 विशेष दिनों को


इस साल मंगलवार, 25 मई 2021 से नौतपा से शुरू हो गया है। नौतपा के कारण गर्मी बढ़ने लगती है। इस दौरान तापमान बेहद उच्च होता है। उत्तर भारत में गर्म हवाएं यानी लू चलने लगती है। नौतपा में नौ दिनों तक गर्मी अपने चरम पर होती है।

1 प्रतिवर्ष ग्रीष्म ऋतु में नौतपा प्रारंभ होता है। इस बार नौतपा वैशाख शुक्ल की चतुर्दशी 25 मई से शुरू होकर 3 जून तक रहेगा। इस बार शुरुआती पांच दिन अधिक दिक्कत के रहेंगे। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही धरती का तापमान तेजी से बढ़ने लगेगा।

2 नौतपा का संबंध ज्योतिष से जुड़ा है। ज्योतिष की गणना के अनुसार, जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो नौतपा प्रारंभ हो जाता है। सूर्य इस नक्षत्र में नौ दिनों तक रहता है।

3 इस साल रोहिणी का निवास तट पर रहेगा। बारिश अच्छी होगी, जिससे फसल का उत्पादन भी अच्छा होगा

4 सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है, तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है।


5 नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर प्रभाव डालती है। इससे प्रचंड गर्मी होती है तो मानसून में अच्छी बारिश होने के आसार बनते हैं। इस वर्ष नौतपा के दौरान बारिश के आसार बनेंगे।


6 ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं।

7 खगोल विज्ञान के अनुसार, इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं। जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है।


8 कई ज्योतिषी मानते हैं कि यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है।


9 मान्यता के अनुसार, नौतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है।


10 कहते हैं जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है। 11 सनातन संस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में भी पूजा जाता रहा है।

12 वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा और देवता ब्रह्मा हैं।


13 सूर्य ताप, तेज का प्रतीक है, जबकि चंद्र शीतलता का। चंद्र से धरती को शीतलता प्राप्त होती है।


14 सूर्य जब चंद्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो इससे वह उस नक्षत्र को अपने पूर्ण प्रभाव में ले लेता है।


15 जिस तरह कुंडली में सूर्य जिस ग्रह के साथ बैठ जाए वह ग्रह अस्त के समान हो जाता है, उसी तरह चंद्र के नक्षत्र में सूर्य के आ जाने से चंद्र के शीतल प्रभाव क्षीण हो जाते हैं यानी पृथ्वी को शीतलता प्राप्त नहीं हो पाती। इस कारण ताप अधिक बढ़ जाता है।


16 नौतपा का जितना महत्व ज्योतिष शास्त्र में है, उतना ही वैज्ञानिक भी इसे मान्य करते हैं।

17 नौतपे के शुरुआती तीन दिनों में पहनावे और खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए। सूती वस्त्र धारण करना चाहिए ताकि त्वचा संबंधी रोगों से बचा जा सकें।


18 यह समय सूर्य का पापाक्रांत समय होता है। इस दौरान पेट से संबंधी बीमारियों के होने की आशंका अधिक होती है। हल्का भोजन लें और पानी ज्यादा से ज्यादा पीएं। मौसम के हिसाब से होने वाली व्याधियों से बचने की जरूरत है। खाने-पीने का भी विशेष ध्यान रखें।


19 नौतपा को केवल ज्योतिष में ही मान्यता प्राप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक भी इस तथ्य से वाकिफ रखते हैं। वैज्ञानिक मतानुसार नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती है। इस कारण तापमान बढ़ता है।


20 नौतपा के 9 दिनों में अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है, साथ ही शरीर का ठंडक देने वाली चीजों का सेवन करना चाहिए।


21 शास्त्रों के मुताबिक, इसके शुरुआती 9 दिन ही नौतपा के माने जाते हैं। 22 भारतीय परंपरा में नौतपा को विशेष महत्व प्रदान किया गया है। इन दिनों महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं क्योंकि मेहंदी गर्मी के प्रभाव को कम करती है।


23 जब सूर्य वृषभ राशि में रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करते हैं, तब गर्मी तेज होती है।


24 सूर्य के प्रवेश से रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा का प्रभाव कम हो जाता है, यही कारण है कि नौ दिन तापमान बढ़ता है।


25 अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती है। चूंकि समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है इसलिए हवाओं का यह रूख अच्छी बारिश का संकेत देता है।

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