दुनिया का एकलौता शहर : जहां है अष्ट भैरवों का निवास, नौ देवियों रखती हैं इन पर नजर


सनातनधर्म में देवी देवताओं की पूजा-अर्चना, सात्विक व तामसी दोनों विधियों से की जाती है। वहीं शिवभक्त और देवी भक्त दोनों के मध्य पवित्र स्थान धारण करने वाले भैरव देव भगवान शंकर के पूर्णावतारों में अंतिम हैं, जिन्हें रुद्रावतार भी कहा जाता है।

देश दुनिया में जहां भी देवी के मंदिर होते हैं, वहां भैरव ही देवी माता की सुरक्षा में लगे दिखते हैं या यूं कहें कि देवी मंदिर बीच में और भैरव मंदिर चारों ओर होते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि एक ऐसा शहर भी है, जहां अष्ट भैरव मौजूद है और इनके चारों ओर नौ देवियां विराजती है।

भैरव जी का वाहक... श्वान भैरव जी का वाहन है, जिन्हें भैरो बम भी कहा जाता है। भैरव जी हर देवी पीठ और शैव तीर्थ में विराजमान रहते हैं तो कई जगह इनके स्वतंत्र पूजा स्थल भी हैं। श्री भैरव जी की जयंती मार्गशीर्ष माह की कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है और अष्टमी तिथि को आठ पर्व- जन्माष्टमी, राधाष्टमी, दुर्गाष्टमी, दुर्वाष्टमी, भीष्माष्टमी, गोपाष्टमी, शीतलाष्टमी व भैरवाष्टमी- मनाए जाते हैं। इनमें भैरवाष्टमी वर्ष की अंतिम अष्टमी है। भैरव जी के प्रधान रूपों की संख्या भी आठ ही है, जिन्हें अष्ट भैरव कहा गया है।

दरअसल हिन्दू-मान्यताओं के अनुसार देवी मां के मंदिर के पास भैरव का मंदिर माता की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। वहीं कुछ इन्हें देवी मां का द्वारपाल भी मानते हैं। मान्यता के अनुसार देवी मंदिरों पर एक भैरव की नियुक्ति की जाती है।

पर क्या आप जनते हैं कि दुनिया में एकमात्र ऐसा शहर भी है, जहां अष्ट भैरव रहते हैं और उनकी रक्षा या यूं कहें निगरानी स्वयं नौदेवियां करती हैं। जी हां, देश ही नहीं दुनिया का एकमात्र शहर ये है देवभूमि उत्तरांचल का अल्मोड़ा शहर। मंदिरों के इस शहर को कुमाऊं का शीशफूल भी कहा जाता है। कुमाऊं का सबसे प्राचीन शहर अल्मोड़ा सांस्कृतिक व एतिहासिक दृष्टि से खासा नाम रखता है।

मान्यता के अनुसार काषाय पर्वत की चोटी पर बसे इस शहर की खासी विशेषता है कि यह दैवीय शक्तियों से परिपूर्ण है। जो चहुंओर से अष्ट भैरव व नव दुर्गा मंदिरों से घिरा है। मान्यता है कि सदियों से अष्ट भैरव व नौ दुर्गा इस शहर को सुरक्षित रखे हुए हैं। आपदाओं के वक्त ये दैवीय शक्तियां शहर को सुरक्षित निकाल लेती हैं। साथ ही शहर में स्थित अष्ट भैरवों के चारों ओर पहाड़ियों पर देवी मां के मंदिर इन भैरवों की पहरेदारी करते प्रतीत होते हैं।

इन्हीं देवी मंदिरों में से एक हैं कसार देवी का मंदिर जिसकी 'असीम' शक्ति से नासा के वैज्ञानिक भी हैरान हैं। दरअसल यह मंदिर अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र भी हैं। जहां दुनिया का सबसे अधिक चुम्कत्व पाया गया।

यहां देवी मां चारों दिशाओं में विविध रूपों में विराज मान हैं। पर्यटन के रूप में विकसित नहीं हो पायी सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा-संस्कृति, परम्परा व ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे कुमाऊं में अल्मोड़ा का विशिष्ट स्थान है। यहां नौ दुर्गा के मंदिरों में हर साल सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं।

कहा जाता है कि अल्मोड़ा शहर को बसाने वाले चंद राजाओं ने इसे जहां भौतिक रूप से सुरक्षित बनाया, वहीं दैवीय शक्तियों से भी चारों दिशाओं से सुरक्षित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कभी चंद राजाओं की राजधानी रही अल्मोड़ा नगरी की चारों दिशाओं मेंं विघ्न विनाशक भगवान गणेश स्थापित हैं।

विपदाओं को हरने के लिए अष्ट भैरव... यही नहीं नगर की रक्षा के लिए अष्ट भैरव विपदाओं को हरने के लिए हर पल मौजूद हैं। प्रदेश में यहीं नौ दुर्गाओं के मंदिर भी स्थापित हैं। वहीं अल्मोड़ा के चारों ओर की चोटियों व नगर में विभिन्न रूपों में शक्ति स्वरूपा देवी माताएं रक्षा कर रही हैं। माता के नौ रूपों का वर्णन पुराणों व धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है।

इसके अलावा नगर में भी अलग-अलग स्थानों पर मां कई रूपों में विद्यमान हैं। इसे अल्मोड़ा नगरी का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि अल्मोड़ा के चारों ओर रहने वाले वाशिंदों को प्रात: उठते ही हर दिशा में शिखरों पर स्थित मां के दर्शन होते हैं।

मान्यता है कि सदियों से अष्ट भैरव व नौ दुर्गा इस शहर को सुरक्षित रखे हुए हैं। आपदाओं के वक्त ये दैवीय शक्तियां शहर को सुरक्षित निकाल लेती हैं।


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