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  • Acharya Bhawana Sharma

जानिए क्या है माला में 108 मनकों का गणित, क्या है जाप करने का सही तरीका !


हिंदू धर्म में तमाम कार्यों की सिद्धि के लिए माला से मंत्रों का जाप किया जाता है. ये मालाएं रुद्राक्ष, तुलसी, वैजयंती, स्फटिक, मोतियों या रत्नों से बनी होती हैं. तमाम देवी देवताओं के मंत्रों के जाप के लिए अलग अलग माला से जाप करने के नियम हैं. लेकिन इन नियमों के बीच एक बात समान है, कि सभी मालाओं में कुल 108 मनके होते हैं.

माला में सबसे ऊपर एक बड़ा मनका होता है, जो इन 108 की गिनती में नहीं होता. इस मनके को सुमेरु कहा जाता है. किसी भी मंत्र का जाप सुमेरु के पास वाले मनके से शुरू होता है और दूसरी तरफ इसके पास के मनके पर ही समाप्त होता है. जहां पर जाप समाप्त होता है, वहीं से लौटकर दूसरी माला की गिनती शुरू कर दी जाती है, लेकिन किसी भी हाल में सुमेरु को लांघा नहीं जाता. जानिए इसकी वजह और माला के 108 मनकों का गणित.

इसलिए नहीं लांघा जाता है सुमेरु

माना जाता है कि ब्रह्मांड में सुमेरु की स्थिति सर्वोच्च है. इसलिए जाप के दौरान जिस भगवान का भी ध्यान किया जाता है, उसका स्मरण करते हुए जाप किया जाता है और एक माला पूरी होने के बाद सुमेरु को प्रभु का स्वरूप मानकर मस्तक से स्पर्श कराया जाता है. जिस मनके पर 108 की गिनती समाप्त होती है, उसी से लौटकर अगली माला का जाप शुरू हो जाता है.

108 के गणित को लेकर हैं कई मान्यताएं

माला में 108 मनकों को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. एक मान्यता के अनुसार हर व्यक्ति को दिनभर में कम से कम 10800 बार ईश्वर का ध्यान करना चाहिए, लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है. इसलिए 10800 में से पीछे के दो शून्य हटाकर इस संख्या को 108 कर दिया गया है. व्यक्ति 108 जाप करके 10800 का पुण्य प्राप्त कर सकता है.

दूसरी मान्यता के अनुसार नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है. हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं. यदि 27 का गुणा चार से किया जाए तो 108 की संख्या सामने आएगी. इसी गिनती के साथ ऋषि मुनियों ने 108 मनकों की माला का विधान तैयार किया. माला का एक एक दाना नक्षत्र के एक एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है.

तीसरी मान्यता है कि ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है. ये 12 भाग ही ज्योतिष की 12 राशियां हैं. प्रत्येक राशि का संबन्ध नौ ग्रहों में से किसी एक से है. यदि इन ग्रहों की संख्या 9 का गुणा 12 से किया जाए तो योग 108 प्राप्त होगा. इस आधार पर माला के मनकों की संख्या निर्धारित की गई है.

सूर्य 6 महीने में उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन रहता है. 6 महीने में सूर्य की कुल कलाएं 1,08,000 होती हैं. आखिरी के तीन शून्य हटाने पर ये संख्या 108 रह जाती है. इस तरह माला का हर मनका सूर्य की एक कला का प्रतीक माना जाता है.

ये है जाप करने का तरीका

जाप करते समय माला को मध्यमा उंगली पर रखकर अंगूठे की मदद से एक एक मनके को आगे बढ़ाया जाता है. सुमेरु को कभी भी लांघा नहीं जाता. माला को पकड़ते समय उसे नाभि से नीचे न रखें और नाक के ऊपर न रखें. माला को सीने से करीब 4 अंगुल दूर होना चाहिए. एक माला पूरी होने के बाद वहीं से वापस लौटकर अगली माला का जाप शुरू करें.

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