जानिए किस दिन शुक्र मणि धारण करने से वैवाहिक जीवन में आती है खुशहाली


रत्नों का महत्व हिंदू धर्म में बड़े ही विस्तार से बताया गया है। मनुष्य के सभी समस्याओं के रत्न विज्ञान में सभी रत्नों का अलग-अलग अर्थ एवम् फायदे के बारे में बताया गया है। शुक्र मणि को रत्न विज्ञान में शुक्र देव का कहा गया है। यदि इसे कोई धारण करता है तो शुक्र ग्रह की कृपा दृष्टि उस मनुष्य के ऊपर पड़ती है। यह प्रभावशाली रत्नों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह का प्रभाव सकारात्मक होता है तो उसका वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा होता है। परन्तु यदि शुक्र ग्रह की स्थिती नकारात्मकहै तो इसका असर मनुष्य के दांपत्य जीवन में कई सारी परेशानियों को लाने वाला हो सकता है। क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में वैवाहिक जीवन, रूप – सौंदर्य, भोग - विलास आकर्षण एवं सांसारिक सुखों का कारक शुक्र ग्रह को माना गया है। हिंदू धर्म के मुताबिक ऐसा माना गया है यदि व्यक्ति शुक्र मणि को धारण करता है अपने जीवन में उत्पन्न परेशानियों से काफी हद तक छुटकारा पा सकता है। इसके साथ ही मनी के प्रभाव से घर में सुख-शांति का भी आगमन होता है एवं धन से जुड़ी दिक्कतों का भी समाधान हो जाता है। आइए जानते शुक्रमणि को अभिमंत्रित करने एवम् धारण करने की विधि –

कहां से प्राप्त करें –

बात करें इसे कैसे प्राप्त करते हैं तो जो असली शुक्र मणि होती है वह समुद्र की गहराई में पाई जाती है। मछलियां इसे कोई जैव समझ कर खा जाती है और फिर यह उनके पेट में रह ती है। जब समुद्र में मछुआरे मछलियां पकड़ने आते हैं तो शुक्र मनी इन मछलियों के पेट से प्राप्त होती है। एक मछली के पेट से ऐसा भी नहीं है कि कई सारे शुक्र मणि प्राप्त हो। यह एक ही होता है जो कि डायमंड एवं ओपल से सस्ते दाम पर बाजार में मिल जाती है। शुक्र ग्रह का भाग्य रत्न डायमंड होता है जो कि काफी महंगा मिलता है और हर कोई इसे धारण नहीं कर सकता इसलिए शुक्र देव के आर्शीवाद से वंचित ना होने के लिए लोग शुक्र मणि को धारण करते हैं।


कब धारण कर सकते हैं –

किसी भी मणि को उसके स्वामी ग्रह से संबंध रखने वाले दिन पर धारण करता चाहिए। इससे उस मणि के स्वामी ग्रह की भी विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है और इसका प्रभाव भी दोगुना हो जाता है। मणि को धारण करने का शुभ दिन शुक्रवार है। इस दिन सुबह स्नान करें और मंदिर के समक्ष बैठ जाएं। फिर इस शुक्र मणि को किसी ने तांबे के बर्तन में रखें एवं उसे गंगाजल से शुद्ध कर ले। इसके बाद शुक्र ग्रह का मंत्र ‘ओम शुक्राय नमः’ का 108 बार जाप करें। इसके बाद धूप दिखाकर शुक्र मणि को एक लॉकेट के रूप में धारण कर सकते हैं।


किस धातु में ग्रहण करें –

मणि को धारण करने के लिए सबसे शुभ धातु चांदी को माना जाता है। हालांकि, यदि व्यक्ति चाहे तो सोना, अष्ट धातु या फिर पंचधातु में भी डाल कर धारण कर सकते हैं। आपको बता दें कि अगर व्यक्ति की याददाश्त कमजोर है या फिर क्रिएटिव सोचने में दिक्कत होती है तो उस स्थिति में भी आपके दिमाग के बंद ताले शुक्र मणि को धारण करने से खुल जाते हैं। इसे मानसिक और बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी ग्रहण किया जाता है। यह मणि किसी तरह के रोग एवम् विकारों को भी दूर करने के लिए ग्रहण किया जाता है। यह मानसिक तनाव से रक्षा करने में भी मदद करता है और सभी नकारात्मक ऊर्जा को पर्यावरण में छोड़ देने का काम करता है।

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