जानिए किन लोगों पर नहीं होता किसी बात का असर, जीवनभर रहते हैं परेशान और दुखी


नीति शास्त्र के 10वें अध्याय में आचार्य चाणक्य उन लोगों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें किसी प्रकार का ज्ञान या उपदेश देना व्यर्थ माना जाता है. ऐसे लोगों पर किसी बात का कोई प्रभाव नहीं होता है.

आचार्य चाणक्य की गिनती महान विद्वानों में होती है. उन्हें सफल राजनीतिज्ञ, रणनीतिकार और अर्थशास्त्री माना जाता है. चाणक्य की नीतियों को अपना कर कई राजाओं ने राजपाठ हासिल किया. उनकी राजनीतिज्ञ और रणनीति को समझ पाना मुश्किल था. आचार्य चाणक्य ने अपनी किताब नीति ग्रंथ में हर वर्ग के बारे में लिखा है. जिसकी मदद से व्यक्ति अपने जीवन में अच्छा और सफल मनुष्य बन सकता है.

अन्तः सारविहीनानामुपदेशो न जायते। मलयाऽचलस्सर्गात् न वेणुश्चन्दनायते॥

नीति शास्त्र के 10वें अध्याय में आचार्य चाणक्य बता रहे हैं कि किस प्रकार के लोगों को ज्ञान या उपदेश देना व्यर्थ माना जाता है. ऐसे लोगों पर किसी बात का कोई प्रभाव नहीं होता है. चाणक्य बताते हैं कि ऐसे लोग जिसमें कोई भीतरी योग्यता नहीं होती है. ये लोग बुद्धिहीन हैं, ऐसे व्यक्ति को किसी तरह का कोई उपदेश देना बेकार है. ऐसे व्यक्ति खुद के द्वार उतपन्न की गई गलतियों का दुख भोगते हैं.

चाणक्य के नीति ग्रंथ के मुताबिक जिन लोगों में किसी तरह की भीतरी योग्यता नहीं होती, हृदय साफ नहीं होता है. उस व्यक्ति के मन में बुरे विचार होते हैं, इस तरह के लोगों को किसी भी प्रकार का उपदेश देना बेकार है. ये उसी तरह व्यर्थ है जैसे चंदन वन से आने वाली सुंगधित हवा के स्पर्श से बांस में न तो सुंगध आना और न ही चंदन बन पाता है.

यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किं। लोचनाभ्याम विहीनस्य, दर्पण: किं करिष्यति।।

आचार्य चाणक्य मानते है कि जो लोग बुद्धिहीन है उनका शास्त्र क्या कर सकेगा. ये उसी प्रकार है आंखों से रहित व्यक्ति को दर्पण का कोई लाभ नहीं होता है. इसका मतलब है कि सिर्फ बाहरी साधन से कोई ज्ञानवान नहीं होता है. मनुष्य के अंदर संस्कार होने चाहिए ताकि वो अपने बाहरी ज्ञान को निखार सकें. इसके अलावा उन्होंने कहा, जैसे खेती करने के लिए अगर बीज नहीं डाले और सिर्फ खाद डालने से फसल नहीं उगती है. वहीं, इच्छित फल पाने के लिए सिर्फ खाद डालने से जहरीली फसल उगती हैं जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं होता है.

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