कर्ज से मुक्ति चाहते हैं तो इस दिन ना लें उधार


उधार लेना-देना एक ऐसी दुविधाजनक स्थिति है, जिससे हर कोई बचना चाहता है। लेकिन कई बार जीवन में आए उतार-चढ़ाव हर किसी को किसी ना किसी रूप में कर्ज लेने-देने के लिए मजबूर कर देते हैं। जरूरत पड़ने पर उधार लेना या देना गलत नहीं है, गलत है समय पर इसे ना चुकाना क्योंकि यह व्यक्ति की गरिमा और आपसी संबंधों से जुड़ा मामला है।

उधार चुका नहीं पाता

यह लेन-देन तब दुखदायी हो जाता है, जब उधार लेने वाला व्यक्ति चाहते हुए भी उधार चुका नहीं पाता और दुनिया के सामने अपनी साख गंवा बैठता है। इसके साथ ही उधार देने वाला व्यक्ति धन की हानि के साथ स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। दोनों ही स्थितियों में संबंध दांव पर लग जाते हैं और कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है।

हर पहलू पर नजर

ज्योतिष शास्त्र जीवन के हर पहलू पर नजर रखता है और अधिकांश स्थितियों में समस्या का हल प्रस्तुत करता है। जीवन की इस गंभीर व अवश्यंभावी स्थिति में लोगों के धन, सम्मान और आपसी संबंधों को बचाने के लिए ज्योतिष शास्त्र अनेक उपाय बताता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई मुहूर्त बताए गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर यदि उधार लिया या दिया जाए, तो उसकी वापसी सहज, सुगम हो जाती है। ये मुहूर्त ना सिर्फ उधार लेने वाले, बल्कि देने वाले के लिए भी लाभकारी हैं। इनके अनुसार यदि कर्जदाता या कर्जदार कुछ खास दिनों, वारों या नक्षत्रों का ध्यान रखकर कर्ज लेते या देते हैं, तो इनका निराकरण बिना किसी झंझट के हो जाता है।

संक्रांति पर न लें उधार

उधार लेने के लिए संक्रांति का दिन निषिद्ध माना गया है, क्योंकि इस दिन वृद्दि योग रहता है। इस दिन लिया गया कर्ज बढ़ता जाता है और उसे चुकाना दुष्कर हो जाता है। मंगलवार के दिन भी यथासंभव उधार लेने से बचना चाहिए। इसी प्रकार हस्त नक्षत्र युक्त रविवार हो, तो उस दिन कभी भी ऋण नहीं लेना चाहिए। इस दिन ऋण लेने पर कार्य के संपन्न होने में अनेक प्रकार की अड़चनें आती हैं और उधारी चुकाने में समय खिंचता जाता है। तीनों ही मुहूर्तों में लिया गया उधार जी का जंजाल बन जाता है और हरसंभव प्रयास करके भी उससे छुटकारा मिलना असंभव हो जाता है।

नक्षत्रों को न करें अनदेखा

उधार लेने-देने के मामले में नक्षत्रों की स्थिति का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, अश्लेषा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद, उत्तराषाढ़ा, विशाखा और ज्येष्ठा मूल नक्षत्रों में ना तो ऋण लिया जाना चाहिए और ना ही दिया जाना चाहिए। इन नक्षत्रों में दिए या लिए गए ऋण का कभी निराकरण नहीं हो पाता अर्थात् जीवन के अंत समय तक सिर पर ऋण का बोझ बना रहता है। यह स्थिति कर्ज में जीने और कर्ज में ही मर जाने की उक्ति को साक्षात करती है। उधार देने के मामले में भद्रा व्यतिपात या अमावस का दिन विशेष संकटकारी है। इस दिन दिया गया उधार कभी वापस नहीं मिलता। इन मुहूर्तों में दिए गए उधार झगड़े, विवादों को जन्म देते हैं। कई बार ये विवाद कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाते हैं। धन वापसी के मामले मुकदमेबाजी तक पहुंचने से व्यक्ति का सम्मान तो जाता ही है, दोनों पक्षों को मानसिक यंत्रणा झेलनी पड़ती है और एक ऋण के निराकरण में कई ऋण सिर पर चढ़ जाते हैं। इसीलिए इन दो मुहूर्तों पर भूलकर भी ऋण का लेन देन ना करें।


मंगलवार को चुकाएं ऋण

ऋण चुकाने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन मंगलवार है इस दिन ऋण चुकाने से दोबारा उसे वापस लेने की आशंका निम्नतम हो जाती है। इसी तरह बुधवार को दिन के समय किसी को ऋण ना दें। किसी भी वार को दिया-बत्ती के समय अर्थात् शाम सात से आठ के बीच पैसे का लेन-देन ना करें। यहां तक कि सामान्य धन व्यवहार को भी इस समय टाल दें, उधारी लेना देना तो बिल्कुल ना करें। वैसे तो कहा गया है कि उतने पैर पसारिए, जितनी चादर होए, लेकिन यदि स्थितियां आपको मजबूर कर ही दें तो उपर्युक्त बताए गए मुहूर्तों का ध्यान रखकर आप जीवन में आए इस संकट को स्थायी बनने से रोक सकते हैं। ज्योतिष का उद्देश्य ही व्यक्ति के जीवन की कठिनाइयों को दूर कर उसे सुगम बनाना है। इसलिए दिन, घड़ी, वार की गणना कर, थोड़ा सा सतर्क रहकर पैसे के लेन-देन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न करें ताकि आपकी साख, रिश्तेदारी और जीवन का सुख बना रहे।

3 views0 comments