करतारपुर कॉरिडोर, यहाँ गुरु नानक देव जी ने 17 वर्ष बिताए थे, जानिए करतारपुर की खास बातें और इतिहास


गुरु नानक देव जी की जयंती से 3 दिन पहले पाकिस्तान में स्थित सिखों के सबसे पूजनीय तीर्थस्थलों तक जाने के लिए करतारपुर साहिब गलियारे को बुधवार से दोबारा खोला जाएगा। कोविड-19 के प्रकोप के बाद मार्च 2020 से यहां की यात्रा रुकी हुई थी। आओ जानते हैं कि क्या है करतारपुर कॉरिडोर का इतिहास।

1. करतारपुर कॉरिडोर का सुझाव सबसे पहले पंजाब के दिग्गज नेता कुलदीप सिंह वडाला ने दिया था। उन्होंने इसके लिए कई वर्षों भारत और पाकिस्तान की अथॉरिटी से आग्रह किया। इसके लिए उन्होंने डेरा बाबा नानक और करतारपुर में 18 वर्षों तक अरदास की थी। इस पर भारत-पाक के बीच पहली वार्ता 1998 में हुई थी। इसके बाद वर्तमान सरकार ने इस पर कार्य किया।

2. भारत के तीर्थयात्री पाकिस्तान में पहले करतारपुर साहिब फिर ननकाना साहिब जाते हैं। सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देवजी अपनी 4 प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद 1522 में करतारपुर साहिब में रहने लगे थे। नानकजी ने अपने जीवनकाल के अंतिम 17 वर्ष, 5 माह और 9 दिन यहीं बिताए थे, जबकि उनका जन्म 1469 में वर्तमान पाकिस्तान के तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में हुआ था।

3. पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक भारत ने कॉरिडोर बनाया उसके आगे करतारपुर तक पाकिस्तान ने कॉरिडोर बनाया है।



4. डेरा बाबा नानक वही स्थान है जहां गुरुनानक देवजी ने अपनी पहली उदासी (यात्रा) के बाद 1506 में ध्यान लगाया था। जिस जगह पर बैठकर गुरु नानक देवजी ने ध्यान लगाया था, उस जगह पर 1800 ईस्वी के आसपास महाराजा रणजीत सिंह ने गुरुद्वारा बनवाया।



5. करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में रावी नदी के तट पर स्थित है। यह जगह भारतीय सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित है। भारतीय क्षेत्र डेरा बाबा से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक का दायरा महज 3.5 किलोमीटर है। मतलब लगभग 6.5 किलोमीटर का है यह कॉरिडोर।


6. इस कॉरिडोर को बनाने में भारत सरकार ने 1.74 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जबकि पंजाब सरकार ने डेरा बाबा नानक स्थान पर 159 करोड़ खर्च किए हैं। दूसरी ओर भारत सरकार ने श्रद्धालुओं के टर्मिनल पर 500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

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